क्या बात है की अल्पविकास के सारे पैमानों को पुरा करने के बाद भी बुंदेलखंड देश के स्तरपर सहानुभूति पैदा करने में असफल रहा है ।
क्या एक समाज के रूप में हमारी कोई पहचान नही है या फ़िर कोई और बड़ा षडयंत्र काम कर रहा है ?
इस गंभीर और समसामयिक प्रशन का जबाब तलाशने की एक जबरदस्त जरूरत है ताकि कम से कम इस बात की पड़ताल की जा सके की
क्यो बुंदेलखंड या बुंदेलखंड का विकास राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान नही बना पाया है ?
यह एक बहुत गंभीर मासला है
और
आपकी आवाज और राय बहुत जरूरी है एक बुन्देलखंडी के नाते
एक बेहतर नए बुंदेलखंड के लिए
